Income Tax News: ITR फाइलिंग, नया आयकर कानून 2025, टैक्स रिफंड और नोटिस पर ताज़ा अपडेट (अक्टूबर 2026)
हर साल जब आयकर रिटर्न (Income Tax Return) की तारीख पास आती है, तो करदाताओं के मन में वही सवाल घूमते हैं। अंतिम तारीख कब है, कौन सा फॉर्म भरना है, रिफंड कब आएगा और कहीं नोटिस तो नहीं आ जाएगा। इस बार सवाल थोड़े ज्यादा हैं, क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से देश में नया Income Tax Act 2025 लागू हो चुका है और साथ ही सितंबर के अंत में CBDT ने ऑडिट वाले करदाताओं के लिए तारीखें आगे बढ़ा दी हैं।
इस लेख में हमने आयकर से जुड़ी सबसे ताज़ा खबरों को एक जगह, सरल हिंदी में और पैराग्राफ़ की शैली में समझाया है। आप जानेंगे कि वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म की तारीखें क्या रहीं, नई टैक्स रिजीम की स्लैब क्या हैं, 12 लाख रुपये तक की आय पर टैक्स शून्य कैसे होता है, और रिफंड अटकने पर क्या करना चाहिए। साथ ही AIS और TIS के मिसमैच से आने वाले नोटिस से बचने के व्यावहारिक तरीके भी बताए गए हैं।
Gyani Adda (ज्ञानी अड्डा) पर हमारी कोशिश रहती है कि हर आँकड़ा और हर तारीख भरोसेमंद स्रोत से जाँची हुई हो। जहाँ अलग-अलग वेबसाइटों में अंतर मिला या जहाँ बात हमारी याददाश्त के आधार पर लिखी गई है, वहाँ हमने साफ़ लिख दिया है, ताकि आप फाइल करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर एक बार मिलान कर सकें। यह लेख 25 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।
- ऑडिट वाले करदाताओं के लिए CBDT की नई तारीखें: 21 अक्टूबर और 21 नवंबर 2026
- आकलन वर्ष 2026-27 की सभी ITR तारीखें और देर से रिटर्न भरने के नियम
- नया Income Tax Act 2025 और "टैक्स ईयर" की नई व्यवस्था
- नई टैक्स रिजीम की स्लैब, रिबेट और टैक्स की गणना का उदाहरण
- रिफंड में देरी के कारण, AIS/TIS मिसमैच और नोटिस से बचाव
- स्टेप-बाय-स्टेप गाइड, आधिकारिक लिंक और 5 सवाल-जवाब
एक नज़र में: आयकर की ताज़ा खबरें (Overview Table)
| विषय | ताज़ा स्थिति |
|---|---|
| ऑडिट रिपोर्ट की तारीख (AY 2026-27) | 30 सितंबर 2026 से बढ़कर 21 अक्टूबर 2026 |
| ऑडिट वालों का ITR | 31 अक्टूबर 2026 से बढ़कर 21 नवंबर 2026 |
| ITR-1 और ITR-2 | 31 जुलाई 2026 (तारीख नहीं बढ़ी) |
| ITR-3 और ITR-4 (बिना ऑडिट) | 31 अगस्त 2026 |
| बिलेटेड रिटर्न | 31 दिसंबर 2026 तक, देरी शुल्क के साथ |
| रिवाइज्ड रिटर्न | अब 31 मार्च 2027 तक (रिपोर्ट के अनुसार) |
| नया कानून | Income Tax Act 2025, 1 अप्रैल 2026 से लागू |
| नई रिजीम में टैक्स-फ्री आय | 12 लाख रुपये तक (धारा 87A रिबेट के साथ) |
| बजट 2026 | टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं, रिबेट जारी |
सबसे बड़ी खबर: ऑडिट वाले करदाताओं को 21 नवंबर तक की राहत
28 सितंबर 2026 को CBDT ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके आकलन वर्ष 2026-27 के लिए उन करदाताओं की तारीखें बढ़ाईं, जिन पर टैक्स ऑडिट लागू होता है। इसके तहत टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई, जबकि इन करदाताओं का आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर से बढ़कर 21 नवंबर 2026 हो गई। यानी दोनों मामलों में 21 दिन की मोहलत मिली। रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए सर्कुलर संख्या 07/2026 जारी हुआ है और औपचारिक आदेश अलग से जारी किया जाना था।
किसे मिलेगा यह फायदा?
यह राहत सबके लिए नहीं है। यह उन्हीं करदाताओं पर लागू है जो धारा 139(1) की व्याख्या 2 की तालिका के क्रमांक 2 में आते हैं, यानी जिनके खातों का ऑडिट कराना कानूनन ज़रूरी है। आम तौर पर इनमें वे कारोबारी आते हैं जिनका टर्नओवर तय सीमा से ऊपर है, वे पेशेवर जिनकी कुल रसीदें 50 लाख रुपये से ज्यादा हैं, ऑडिट योग्य कंपनियाँ, फर्म, एलएलपी और ऑडिट वाले ट्रस्ट। कुछ छोटे व्यापारी भी इसमें आ जाते हैं जो प्रिजम्प्टिव योजना में तय मुनाफे से कम आय दिखाते हैं। नियम की बारीकियाँ हर मामले में अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से पुष्टि कर लेना बेहतर रहता है।
वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनधारकों और बिना ऑडिट वाले छोटे कारोबारियों के लिए इस घोषणा में कुछ नहीं है, क्योंकि उनकी मूल तारीखें पहले ही निकल चुकी हैं। इसी तरह ट्रांसफर प्राइसिंग (धारा 92E) वाले मामलों की समयसीमा अलग रखी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार ऐसे मामलों के लिए रिटर्न की तारीख 30 नवंबर 2026 है, लेकिन अपने मामले में पुष्टि के लिए आधिकारिक अधिसूचना ही देखें।
ध्यान रखने वाली बात: मोहलत और ब्याज अलग चीजें हैं
कई करदाता तारीख बढ़ने को टैक्स चुकाने से भी छूट समझ लेते हैं, जो सही नहीं है। रिटर्न भरने की तारीख बढ़ने का मतलब यह नहीं कि बकाया टैक्स पर लगने वाला ब्याज भी माफ हो गया। धारा 234A के तहत देर से चुकाए टैक्स पर सामान्यतः हर महीने 1 प्रतिशत की दर से ब्याज लगता है। इसलिए कई विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि अगर आपका सेल्फ-असेसमेंट टैक्स बकाया है, तो उसे पुरानी तारीख 31 अक्टूबर तक जमा कर दें और बढ़ी हुई मोहलत का इस्तेमाल सिर्फ रिटर्न भरने में करें। यह एक टैक्स-विशेषज्ञ की व्याख्या है, इसलिए अपने मामले में CA से पूछकर ही निर्णय लें।
जिन करदाताओं ने ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की, उनके लिए धारा 271B का जुर्माना भी याद रखना चाहिए। इसमें टर्नओवर का 0.5 प्रतिशत या अधिकतम 1.5 लाख रुपये, जो भी कम हो, जुर्माने के रूप में लग सकता है। चूँकि 21 अक्टूबर की नई तारीख अब निकल चुकी है, इसलिए जिन्हें अब भी ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी बाकी है, उन्हें बिना देर किए अपने CA से संपर्क करके स्थिति समझनी चाहिए।
आकलन वर्ष 2026-27 की ITR तारीखें: कौन सी कब थी
जो लोग यह पढ़ रहे हैं और अब तक रिटर्न नहीं भर पाए, उनके लिए पूरी तारीखों की तस्वीर समझना ज़रूरी है। वेतन, पेंशन और कैपिटल गेंस दिखाने वाले ITR-1 और ITR-2 की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 थी और इसमें कोई बढ़ोतरी की रिपोर्ट नहीं मिली। बिना ऑडिट वाले कारोबारी और पेशेवर, जो ITR-3 या ITR-4 भरते हैं, उनके लिए तारीख 31 अगस्त 2026 रही। कई रिपोर्टों के अनुसार इन्हीं फॉर्मों के नए संस्करण अप्रैल 2026 से उपलब्ध कराए गए थे।
| श्रेणी | अंतिम तारीख |
|---|---|
| ITR-1, ITR-2 (वेतन, पेंशन, कैपिटल गेंस) | 31 जुलाई 2026 |
| ITR-3, ITR-4 (बिना ऑडिट) | 31 अगस्त 2026 |
| ऑडिट रिपोर्ट | 21 अक्टूबर 2026 (बढ़ी हुई) |
| ऑडिट वाले करदाता का ITR | 21 नवंबर 2026 (बढ़ी हुई) |
| ट्रांसफर प्राइसिंग वाले मामले | 30 नवंबर 2026 (एक रिपोर्ट के अनुसार) |
| बिलेटेड रिटर्न | 31 दिसंबर 2026 |
| रिवाइज्ड रिटर्न | 31 मार्च 2027 |
| अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) | 31 मार्च 2031 तक (एक रिपोर्ट के अनुसार) |
अगर तारीख निकल गई हो तो क्या करें?
अगर आपने 31 जुलाई तक रिटर्न नहीं भरा, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं। फर्क इतना है कि इसमें धारा 234F के तहत देरी शुल्क लगता है, जो सामान्यतः 5,000 रुपये है और अगर कुल आय 5 लाख रुपये तक है तो 1,000 रुपये (यह राशि हमारी याददाश्त पर आधारित है, भरने से पहले पोर्टल पर जाँच लें)। इसके अलावा बकाया टैक्स पर धारा 234A का ब्याज भी लगता है। साथ ही देर से रिटर्न भरने पर कुछ नुकसान आगे ले जाने की सुविधा, जैसे कारोबारी घाटे का कैरी-फॉरवर्ड, भी प्रभावित हो सकती है, इसलिए कारोबार करने वालों को खास सावधानी रखनी चाहिए।
जिन्हें अपने भरे हुए रिटर्न में कोई गलती दिखे, उनके लिए अच्छी खबर यह है कि रिवाइज्ड रिटर्न की खिड़की अब पहले से लंबी बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार अब संबंधित वर्ष की समाप्ति के 12 महीने तक, यानी 31 मार्च 2027 तक, रिवाइज्ड रिटर्न भरा जा सकता है, हालाँकि 31 दिसंबर के बाद अतिरिक्त शुल्क लगता है। इसके बाद भी अगर कोई आय छूट गई हो, तो अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) का रास्ता खुला रहता है, जिसमें सामान्यतः अतिरिक्त कर देना पड़ता है।
नया Income Tax Act 2025: क्या बदला और क्या नहीं
सबसे बड़ा ढाँचागत बदलाव यह है कि 1 अप्रैल 2026 से Income Tax Act 2025 लागू हो चुका है, जो छह दशक पुराने Income Tax Act 1961 की जगह लेता है। सरकार का कहना है कि नया कानून सरल भाषा में है और इसमें अनावश्यक और दोहराए गए प्रावधान हटाए गए हैं। आम करदाता के लिए सबसे दिलचस्प बदलाव "टैक्स ईयर" शब्द का आना है। अब तक हम "वित्त वर्ष" और "आकलन वर्ष" दो अलग शब्द इस्तेमाल करते थे, जिनसे अक्सर भ्रम होता था। नए कानून में इनकी जगह एक ही शब्द "टैक्स ईयर" रखा गया है।
यहाँ एक बात खास तौर पर समझ लें। जो रिटर्न अभी भरे जा रहे हैं, यानी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आकलन वर्ष 2026-27 वाले, वे अब भी पुराने कानून, यानी 1961 के अधिनियम की धारा 139 के तहत ही आते हैं। रिपोर्टों के अनुसार नए कानून के तहत रिटर्न दाखिल करने का प्रावधान धारा 263 में है और यह टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होगा, यानी इसका असर 2027 में भरे जाने वाले रिटर्न पर दिखेगा। इसलिए अभी के रिटर्न के लिए पुराने सेक्शन नंबर और तारीखें ही मायने रखती हैं।
कई रिपोर्टों के अनुसार फॉर्मों के नंबर भी बदल रहे हैं। वेतन का प्रमाण-पत्र Form 16 अब Form 130 के नाम से, TDS का Form 16A अब Form 131, नियोक्ता को दिया जाने वाला Form 12BB अब Form 124 और टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट Form 26AS अब Form 168 कहा जाएगा। यह बदलाव वित्त वर्ष 2026-27 से लागू बताया गया है। आयकर विभाग ने पुराने और नए कानून की धाराओं का मिलान करने वाला एक टूल भी जारी किया है, जिससे यह देखा जा सकता है कि पुरानी धारा 80C जैसी चीजें नए कानून में किस नंबर पर मिलेंगी। चूँकि सेक्शन नंबर बदल गए हैं, इसलिए CA या टैक्स सॉफ्टवेयर से बात करते समय नए और पुराने दोनों नंबर देख लेना समझदारी है।
नई टैक्स रिजीम की स्लैब: 12 लाख तक टैक्स शून्य कैसे?
बजट 2026 में आम करदाताओं के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया और धारा 87A की रिबेट पहले की तरह जारी रही। इसलिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई टैक्स रिजीम की स्लैब वही हैं जो पिछले साल थीं। चार लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता। इसके ऊपर हर चार लाख के दायरे में दर बढ़ती जाती है और 24 लाख रुपये से ऊपर की आय पर सबसे ऊँची दर 30 प्रतिशत लागू होती है।
| कर योग्य आय | टैक्स की दर (नई रिजीम) |
|---|---|
| 4 लाख रुपये तक | शून्य |
| 4 लाख से 8 लाख | 5% |
| 8 लाख से 12 लाख | 10% |
| 12 लाख से 16 लाख | 15% |
| 16 लाख से 20 लाख | 20% |
| 20 लाख से 24 लाख | 25% |
| 24 लाख से ऊपर | 30% |
अब सवाल उठता है कि जब 8 से 12 लाख की स्लैब में टैक्स लगता है, तो 12 लाख तक आय वाले को टैक्स-फ्री क्यों कहा जाता है। इसका जवाब धारा 87A की रिबेट है। नई रिजीम में यह रिबेट अधिकतम 60,000 रुपये की है। 12 लाख की कर योग्य आय पर स्लैब के हिसाब से टैक्स बनता है 4 से 8 लाख पर 20,000 रुपये और 8 से 12 लाख पर 40,000 रुपये, यानी कुल 60,000 रुपये। रिबेट इसी 60,000 को शून्य कर देती है, इसलिए कुल टैक्स देनदारी शून्य रह जाती है। जो लोग वेतनभोगी हैं, उन्हें नई रिजीम में 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलती है, इसलिए उनकी कुल वेतन आय लगभग 12.75 लाख रुपये तक टैक्स-फ्री मानी जाती है (स्टैंडर्ड डिडक्शन की यह राशि हमारी याददाश्त पर आधारित है, इसलिए अपने फॉर्म 16 से मिलान करें)।
12 लाख रुपये से ऊपर जाते ही रिबेट खत्म होती है और स्लैब के हिसाब से पूरा टैक्स देना पड़ता है। उदाहरण के लिए अगर किसी की कर योग्य आय 15 लाख रुपये है, तो टैक्स बनेगा 4 से 8 लाख पर 20,000, 8 से 12 लाख पर 40,000 और 12 से 15 लाख पर 15 प्रतिशत के हिसाब से 45,000, यानी कुल 1,05,000 रुपये। इसमें 4 प्रतिशत स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर जोड़ने पर कुल रकम करीब 1,09,200 रुपये हो जाती है। ध्यान रहे कि शेयर या संपत्ति के कैपिटल गेंस जैसी विशेष दर वाली आय पर यह रिबेट सामान्यतः लागू नहीं होती, इसलिए ऐसे मामलों में गणना अलग से करनी चाहिए।
पुरानी रिजीम की बात करें तो उसमें अब भी कर योग्य आय 5 लाख रुपये तक होने पर धारा 87A की रिबेट मिलती है, लेकिन यहाँ दरें और छूट की संरचना अलग है और कटौतियों का सहारा लेना पड़ता है। इसलिए दोनों रिजीम की तुलना करना ज़रूरी है।
पुरानी और नई रिजीम में से कौन सी चुनें?
इसका कोई एक जवाब नहीं है, क्योंकि यह आपकी कटौतियों पर निर्भर करता है। पुरानी रिजीम में आप धारा 80C (जैसे PPF, ELSS म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस) में 1.5 लाख रुपये तक, स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम पर धारा 80D की कटौती, होम लोन के ब्याज और HRA की छूट जैसी सुविधाएँ ले सकते हैं। अगर आपकी ये सब कटौतियाँ मिलाकर काफी बड़ी बनती हैं, यानी आपने होम लोन लिया है, बड़ा बीमा कवर है और निवेश भी करते हैं, तो पुरानी रिजीम कभी-कभी सस्ती पड़ सकती है। वहीं जिन लोगों के पास गिनाने लायक कटौतियाँ कम हैं, उनके लिए नई रिजीम सीधी और अक्सर ज्यादा फायदेमंद रहती है, क्योंकि इसमें स्लैब चौड़ी हैं और 12 लाख तक की रिबेट है।
सरल तरीका यह है कि अपनी कुल सालाना आय और संभावित कटौतियों के साथ दोनों रिजीम में टैक्स की गणना करके देखें। आयकर पोर्टल पर और कई मान्य टैक्स टूल पर तुलना की सुविधा मिलती है। इस साल का एक व्यावहारिक सुझाव यह भी है कि नए कानून में धाराओं के नंबर बदलने से भ्रम हो सकता है, इसलिए निवेश के प्रमाण और बीमा की रसीदें पहले से एक फोल्डर में सँभालकर रखें। नियोक्ता के NPS योगदान पर मिलने वाली कटौती जैसी कुछ सुविधाएँ नई रिजीम में भी मिलती हैं, पर इसके नियम जाँच लें।
कौन सा ITR फॉर्म भरें?
गलत फॉर्म भरना सबसे आम गलतियों में से एक है, और इससे रिटर्न "दोषपूर्ण" घोषित हो सकता है। इसलिए पहले यह समझ लें कि आपकी आय का स्रोत क्या है। ITR-1 (सहज) सामान्यतः उन निवासी व्यक्तियों के लिए है जिनकी आय वेतन, एक मकान की संपत्ति या अन्य स्रोतों से है और कुल आय तय सीमा के अंदर है। जिन लोगों को शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति बेचने से कैपिटल गेंस हुआ है, या जिनके पास एक से अधिक मकान हैं, वे सामान्यतः ITR-2 भरते हैं।
जिन्हें कारोबार या पेशे से आय होती है, यानी दुकानदार, फ्रीलांसर, सलाहकार, डॉक्टर या वकील, वे ITR-3 भरते हैं। अगर आप प्रिजम्प्टिव योजना, यानी अनुमानित मुनाफे वाली सुविधा चुनते हैं, तो आप ITR-4 (सुगम) भर सकते हैं। फॉर्म चुनते समय पात्रता की शर्तें हर साल थोड़ी बदल सकती हैं, इसलिए आयकर पोर्टल पर दिए निर्देश ज़रूर पढ़ें। कंपनियों और फर्मों के लिए अलग फॉर्म होते हैं और कंपनी या फर्म आम तौर पर आय शून्य होने पर भी रिटर्न भरती हैं।
आय कम होने पर भी रिटर्न कब ज़रूरी है?
बहुत से लोग मानते हैं कि आय मूल छूट सीमा से कम हो तो रिटर्न भरने की ज़रूरत नहीं है, पर कुछ स्थितियों में यह धारणा गलत साबित होती है। रिपोर्टों के अनुसार, अगर किसी ने एक वित्त वर्ष में चालू खाते में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा जमा किए हों, विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च किया हो, या बिजली का बिल एक लाख रुपये से ज्यादा रहा हो, तो आय कम होने पर भी रिटर्न भरना आवश्यक हो सकता है। इसके अलावा रिफंड पाने, घाटा आगे ले जाने या लोन और वीज़ा के लिए आय का प्रमाण बनाने के लिए भी रिटर्न भरना फायदेमंद रहता है।
इनकम टैक्स रिफंड में देरी: कारण और समाधान
रिटर्न भरने के बाद सबसे ज्यादा इंतज़ार रिफंड का होता है। जनवरी 2026 में आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कई करदाताओं का रिफंड उम्मीद से ज्यादा समय ले रहा था और इसके पीछे कुछ आम कारण बताए गए। पहला कारण डेटा का मिलान है। विभाग आपके रिटर्न को Form 26AS, AIS और TIS से मिलाता है और छोटा सा अंतर भी प्रक्रिया को धीमा कर सकता है। एक टैक्स विशेषज्ञ के हवाले से बताया गया कि यह जाँच विरोधी नहीं बल्कि सावधानी भरी होती है, क्योंकि विभाग के पास पहले से कहीं ज्यादा डेटा है।
दूसरा बड़ा कारण अधूरा ई-वेरिफिकेशन है। रिटर्न भरने के बाद उसे आधार OTP, नेट बैंकिंग, डीमैट खाते या ITR-V के ज़रिए सत्यापित करना होता है। सत्यापन के बिना रिटर्न को मान्य नहीं माना जाता और रिफंड जारी नहीं होता। हमारी जानकारी के अनुसार इसके लिए सामान्यतः रिटर्न भरने के 30 दिन के अंदर सत्यापन करना होता है, पर इस समय सीमा की पुष्टि पोर्टल पर कर लें। तीसरा कारण बैंक खाते की समस्या है। अगर रिफंड वाला खाता पोर्टल पर पहले से वैलिडेट नहीं है, या खाता निष्क्रिय है, या IFSC कोड पुराना है, तो पैसा अटक सकता है। चौथा कारण पुराने बकाया टैक्स से समायोजन है, जिसकी सूचना ईमेल या पोर्टल पर आती है, पर बहुत से लोग उसे देख नहीं पाते।
रिफंड अटके तो क्या करें?
सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करके अपने रिटर्न की स्थिति, नोटिस और संदेश देखें, क्योंकि अधिकतर जवाब वहीं मिल जाते हैं। यह भी देखें कि स्टेटस "प्रोसेस्ड" है या "रिफंड जारी", क्योंकि प्रोसेस हो जाना और खाते में पैसा आना दोनों अलग बातें हैं। अगर कहीं कोई गड़बड़ी नहीं दिखती, तो पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। फिर भी हल न निकले तो CPC की हेल्पलाइन से संपर्क करें और ज़रूरत पड़ने पर संबंधित आकलन अधिकारी तक बात पहुँचाएँ। पोर्टल पर अपना बैंक खाता पहले से वैलिडेट रखना और रिटर्न में दिए आँकड़ों को AIS से मिलाकर भरना सबसे अच्छा बचाव है।
AIS, TIS और नोटिस: मिसमैच से कैसे बचें?
आयकर विभाग अब सिर्फ आपके बताए आँकड़ों पर निर्भर नहीं रहता। आपके बैंक ब्याज, शेयर और म्यूचुअल फंड की खरीद-बिक्री, संपत्ति के लेनदेन, क्रिप्टो या अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट के सौदे और बड़ी नकद जमा जैसी जानकारी विभिन्न संस्थाओं से विभाग तक पहुँचती है, और वही आपके AIS (वार्षिक सूचना विवरण) और TIS (करदाता सूचना सारांश) में दिखती है। रिपोर्टों के अनुसार CBDT समय-समय पर ऐसे करदाताओं को ईमेल और SMS भेजता है जिनके रिटर्न और AIS के आँकड़ों में अंतर दिखता है। इनमें वे लोग भी आते हैं जिन्होंने रिटर्न ही नहीं भरा, जबकि AIS में उनकी आय या बड़े लेनदेन दर्ज थे।
इसलिए रिटर्न भरने से पहले पोर्टल में अपने PAN से लॉग-इन करें, AIS खोलें, संबंधित वर्ष चुनें और हर प्रविष्टि को अपने बैंक स्टेटमेंट, फॉर्म 16 और ब्रोकर की रिपोर्ट से मिलाएँ। अगर कोई प्रविष्टि गलत है, जैसे किसी और का लेनदेन आपके खाते में दिख रहा है या राशि गलत दर्ज है, तो पोर्टल पर फीडबैक देकर उसे ठीक कराया जा सकता है। जिन्होंने क्रिप्टो से कमाई की है, उन्हें अपने सभी एक्सचेंज और वॉलेट के लेनदेन जोड़कर सही रिपोर्ट बनानी चाहिए, क्योंकि सही रिपोर्टिंग के बाद भी AIS में अंतर होने पर नोटिस आ सकता है।
नोटिस आए तो घबराएँ नहीं
हर नोटिस का मतलब जाँच या जुर्माना नहीं होता। कई बार यह सिर्फ सूचना या स्पष्टीकरण माँगने वाला संदेश होता है। नोटिस मिलने पर उसे ध्यान से पढ़ें, देखें कि वह किस धारा के तहत है और जवाब की अंतिम तारीख क्या है। फिर पोर्टल पर "ई-प्रोसीडिंग्स" में जाकर निर्धारित समय में जवाब दें। अगर रिटर्न में गलती हुई है, तो रिवाइज्ड या अपडेटेड रिटर्न भरकर उसे सुधारा जा सकता है। नोटिस को अनदेखा करना सबसे महँगा पड़ता है, क्योंकि इससे जुर्माना, ब्याज और कुछ मामलों में कार्रवाई तक की नौबत आ सकती है। फर्जी ईमेल और SMS से भी सावधान रहें। कोई भी वैध संदेश आपसे OTP, पासवर्ड या कार्ड की जानकारी नहीं माँगेगा।
1 अप्रैल 2026 से बदले अन्य नियम जो आपको छू सकते हैं
नए कानून के साथ कई छोटे लेकिन असरदार बदलाव भी आए हैं, जिन्हें रिपोर्टों में गिनाया गया है। विदेश में पढ़ाई और इलाज के लिए LRS के तहत भेजे गए पैसे पर TCS की दर 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई बताई गई है, और विदेशी टूर पैकेज पर भी अब 2 प्रतिशत की एक समान दर बताई गई है, जो पहले सीमा के हिसाब से 5 और 20 प्रतिशत थी। शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए ऑप्शंस और फ्यूचर्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने की रिपोर्ट है। फ्यूचर्स की बिक्री पर यह 0.02 से बढ़कर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शन प्रीमियम की बिक्री पर 0.1 से बढ़कर 0.15 प्रतिशत बताया गया है।
शेयर बायबैक पर मिलने वाली रकम को अब डिविडेंड की जगह कैपिटल गेंस के रूप में कर के दायरे में लाने की बात कही गई है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की परिपक्वता पर टैक्स छूट केवल उन्हीं को बताई गई है जिन्होंने बॉन्ड शुरुआती इश्यू में खरीदे, जबकि सेकेंडरी बाजार से खरीदने वालों पर कैपिटल गेंस टैक्स लग सकता है। इसके अलावा डिविडेंड या म्यूचुअल फंड यूनिट की आय में से ब्याज का खर्च घटाने की अनुमति नहीं रहने की रिपोर्ट है।
वेतनभोगियों के लिए HRA की 50 प्रतिशत छूट वाले शहरों में बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद के जुड़ने की बात कही गई है, जिससे ऐसे शहर कुल आठ हो गए। मकान मालिक से रिश्ता बताने की शर्त भी जुड़ी बताई गई है। साथ ही कुछ भत्तों और सुविधाओं की सीमाएँ बढ़ाई गई हैं, जैसे बच्चों की शिक्षा पर प्रति माह 3,000 रुपये, हॉस्टल भत्ते पर 9,000 रुपये, मुफ्त भोजन पर प्रति भोजन 200 रुपये और गैर-नकद उपहार पर सालाना 15,000 रुपये। चूँकि ये सारे विवरण द्वितीयक रिपोर्टों पर आधारित हैं, इसलिए अपने नियोक्ता या CA से इनकी पुष्टि ज़रूर करें।
आयकर रिटर्न भरने की स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
अगर आप पहली बार या खुद रिटर्न भर रहे हैं, तो नीचे दिए क्रम का पालन करें। हर कदम को आराम से और बिना जल्दबाज़ी के पूरा करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
- दस्तावेज़ इकट्ठा करें। PAN, आधार, फॉर्म 16, बैंक स्टेटमेंट, ब्याज प्रमाण-पत्र, निवेश और बीमा की रसीदें और कैपिटल गेंस की रिपोर्ट अपने पास रखें।
- पोर्टल पर लॉग-इन करें। आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपने PAN और पासवर्ड से प्रवेश करें। आधार PAN से लिंक होना चाहिए।
- AIS, TIS और 26AS देखें। अपने आँकड़ों का मिलान करें और जहाँ अंतर दिखे, पहले उसे समझें।
- सही ITR फॉर्म चुनें। अपनी आय के स्रोत के हिसाब से ITR-1, 2, 3 या 4 चुनें।
- टैक्स रिजीम तय करें। दोनों रिजीम में गणना करके कम टैक्स वाली रिजीम चुनें।
- विवरण भरें और टैक्स चुकाएँ। आय, कटौतियाँ और TDS भरें। अगर कुछ टैक्स बकाया है तो चालान से जमा करें।
- रिटर्न सबमिट करके ई-वेरिफाई करें। आधार OTP या नेट बैंकिंग से सत्यापन करना न भूलें, वरना रिटर्न अधूरा माना जाएगा।
- रिफंड की स्थिति देखते रहें। पोर्टल पर स्टेटस जाँचें और बैंक खाता वैलिडेट रखें।
वे गलतियाँ जो अक्सर महँगी पड़ती हैं
सबसे आम गलती है AIS देखे बिना रिटर्न भर देना, जिससे बाद में नोटिस आ जाता है। दूसरी गलती है ब्याज की आय छोड़ देना, खासकर बचत खाते, FD और RD का ब्याज, जो अक्सर लोग भूल जाते हैं। तीसरी गलती है नौकरी बदलने वाले वर्ष में दोनों नियोक्ताओं की आय न जोड़ना। चौथी गलती गलत बैंक खाता देना या ई-वेरिफिकेशन भूल जाना है। पाँचवीं गलती है आखिरी दिन तक इंतज़ार करना, जब पोर्टल पर भीड़ के कारण दिक्कत आ सकती है। अच्छी आदत यही है कि रिटर्न तारीख से बहुत पहले भरें और भरने के बाद उसकी प्रति सँभालकर रखें।
आधिकारिक लिंक (Official Links)
- आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (incometax.gov.in)
- ई-फाइलिंग पोर्टल: लॉग-इन, ITR, AIS और रिफंड स्थिति
- CBDT के प्रेस विज्ञप्ति और सर्कुलर (incometaxindia.gov.in)
- CBDT प्रेस विज्ञप्ति: AY 2026-27 के ऑडिट मामलों की तारीख बढ़ी
- TIN-NSDL: टैक्स भुगतान और स्टेटस
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: ऑडिट वाले करदाताओं की नई ITR तारीख क्या है?
CBDT की घोषणा के अनुसार आकलन वर्ष 2026-27 में ऑडिट वाले करदाताओं का ITR अब 21 नवंबर 2026 तक भरा जा सकता है, और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की तारीख 21 अक्टूबर 2026 रखी गई थी।
प्रश्न 2: क्या वेतनभोगी अब भी ITR भर सकते हैं?
हाँ। ITR-1 और ITR-2 की मूल तारीख 31 जुलाई 2026 थी, जो निकल चुकी है। अब आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न भर सकते हैं, पर देरी शुल्क और बकाया टैक्स पर ब्याज लग सकता है।
प्रश्न 3: क्या 12 लाख रुपये तक की आय पर बिलकुल टैक्स नहीं लगता?
नई टैक्स रिजीम में कर योग्य आय 12 लाख रुपये तक होने पर धारा 87A की रिबेट के कारण सामान्य आय पर टैक्स शून्य हो जाता है। कैपिटल गेंस जैसी विशेष दर वाली आय पर यह रिबेट आम तौर पर लागू नहीं होती।
प्रश्न 4: रिफंड कब तक आना चाहिए?
कोई तय समयसीमा सभी के लिए लागू नहीं होती। सही ई-वेरिफिकेशन, वैलिडेट बैंक खाता और AIS से मिलते आँकड़े होने पर रिफंड सामान्यतः जल्दी आ जाता है। देरी होने पर पोर्टल पर नोटिस और स्थिति देखें।
प्रश्न 5: क्या नया आयकर कानून मौजूदा रिटर्न पर लागू होता है?
नहीं। वित्त वर्ष 2025-26 के रिटर्न, यानी आकलन वर्ष 2026-27, अब भी पुराने 1961 के अधिनियम की धारा 139 के अंतर्गत भरे जाते हैं। नया कानून 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले टैक्स ईयर पर असर डालता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
आयकर की दुनिया में इस समय दो बातें साथ चल रही हैं। एक तरफ पुराने नियमों के तहत आकलन वर्ष 2026-27 के रिटर्न, तारीखें और नोटिस हैं, तो दूसरी तरफ नया Income Tax Act 2025 अपने नए शब्दों, नए फॉर्म नंबरों और टैक्स ईयर की अवधारणा के साथ आ चुका है। ऑडिट वाले करदाताओं के लिए 21 नवंबर की मोहलत राहत है, लेकिन टैक्स का ब्याज और जुर्माना फिर भी याद रखना ज़रूरी है। बाकी करदाताओं के लिए बिलेटेड रिटर्न का रास्ता 31 दिसंबर तक खुला है।
सबसे अच्छी आदत यह है कि AIS और 26AS देखकर ही रिटर्न भरें, सही फॉर्म चुनें, दोनों टैक्स रिजीम की तुलना करें और ई-वेरिफिकेशन को आखिरी दिन के लिए न छोड़ें। अगर आपकी स्थिति जटिल है, जैसे कारोबार, कैपिटल गेंस, क्रिप्टो या विदेशी आय, तो किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट की सलाह लेना बेहतर रहता है।
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जानकारी के स्रोत
- CBDT प्रेस विज्ञप्ति (28 सितंबर 2026): AY 2026-27 के ऑडिट मामलों की तारीख
- India Briefing: CBDT ने AY 2026-27 के ऑडिट मामलों की तारीख बढ़ाई
- TaxGuru: ऑडिट तारीख 21 अक्टूबर 2026, किसे राहत
- ClearTax: 1 अप्रैल 2026 से आयकर में बदलाव
- 5paisa: संशोधित ITR कैलेंडर, बिना ऑडिट वालों को अतिरिक्त समय
- Storyboard18: बजट 2026, टैक्स दरों में बदलाव नहीं
- Outlook Money: ITR रिफंड में देरी (जनवरी 2026)
- KoinX: ITR मिसमैच नोटिस और बचाव
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार किया गया है और यह टैक्स, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं है। तारीखें, दरें और नियम सरकार द्वारा कभी भी बदले जा सकते हैं। कई विवरण द्वितीयक समाचार स्रोतों पर आधारित हैं, इसलिए रिटर्न भरने या कोई निर्णय लेने से पहले आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट से पुष्टि ज़रूर करें। Gyani Adda इस जानकारी के उपयोग से हुए किसी नुकसान के लिए ज़िम्मेदार नहीं है।
लेख में प्रयुक्त चित्र Gyani Adda द्वारा बनाए गए प्रतीकात्मक इलस्ट्रेशन हैं। वे किसी असली दस्तावेज़ या सरकारी प्रतीक का प्रतिनिधित्व नहीं करते।


